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Introduction

Rigveda 6.47.15

Atharva 6.94

Aapah in Atharvaveda

Single - multiple waters

Polluted waters

Indu

Kabandha

Barhi

Trita

naukaa

nabha

Sindhu

Indra

Vapu

Sukham

Eem

Ahi

Vaama

Satya

Salila

Pavitra

Swah

Udaka

 

 

First published on internet : 11-4-2008AD( Chaitra shukla shashthee, Vikrama samvat 2065)

वेद में उदक का प्रतीकवाद

- सुकर्मपाल सिंह तोमर

(चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा १९९५ . में स्वीकृत शोधप्रबन्ध )

स्व और स्व:

जो स्व: अतीन्द्रिय और अतिमानसिक ज्योvति के रूप में हमारे भीतर छिपा रहता है, वह समाधि के उपरान्त व्युत्थानावस्था में साधक को प्रत्यक्ष हो जाता है अङ्गिरसों द्वारा 'स्व:' की सुप्रसिद्ध खोज वस्तुतः इस निहित ज्योvति के प्रत्यक्षीकरण की क्रिया है यह 'स्व:' स्व के लिए सुहृदयतम कहा जाता है (शतपथ ब्राह्मण ...१४) यह स्व: अग्नि की एक दिव्य ऊर्जा है (तैत्तिरीय आरण्यक .१८., शतपथ ब्राह्मण ...१२) यह ऊर्जा रसस्वरूपा है ( शतपथ ब्राह्मण ...१८) इसी स्व: को धारण करके साधक की चेतना स्वधा संज्ञक उदकनाम को ग्रहण करती है, अतः स्वधा को भी रस के रूप में कल्पित किया गया है ( शतपथ ब्राह्मण ...) यह स्व: देवों के रूप में भी कल्पित है, अतः 'देवा: वै स्व:' कहा जाता है ( जैमिनीय ब्राह्मण .६९) यही स्व: मनुष्य में निरन्तर विकसित होते 'स्वधिति' नामक वज्र बन जाता है ( मैत्रायणी संहिता ..) जो सभी आसुरी शक्तियों को नष्ट करके मानव व्यक्तित्व को स्वर्गोपम बना देता है, क्योंकि स्वर्गलोक वस्तुतः स्व: ही है ( जैमिनीय ब्राह्मण .६९) ऐसी स्थिति में शरीर रूपी असुर 'स्वर्विद्' (स्व: का ज्ञाता ) हो जाता है जिसको दिव्य और पितृ शक्तियां 'मानुष' नामक तृतीय कर्म से युक्त कर देती हैं इस प्रकार वे अपने पैतृक दिव्य बल को तथा अपनी निजी प्रजा को अवर प्राणों में स्थापित करके अपने तन्तु को फैला देती हैं ( ऋग्वेद १०.५६.)

          ऋग्वेद १०.२७.२४ में इन्द्र(आत्मा) से प्रार्थना की गई है कि वह उस स्व: (उदक नाम) नामक ज्योvति को अभिव्यक्त करे तथा प्राणोदक को छिपा दे -

सा ते जीवातुरुत तस्य विद्धि सा स्मैतादृ गूहः समर्ये आवि: स्व: कृणुते गूहते बुसं पादुरस्य निर्णिजो मुच्यते ।।

          यही स्व: वह सु है जिसके खनन में प्रयत्नशील होने वाले प्राणोदक को 'सुखं' कहा जा सकता है और इसी 'सुख' नामक रथ पर विराजमान आत्मा को 'सुखरथ' कहा जाता है

This page was last updated on 08/12/10.